*SNA-SPARSH* भारत सरकार (वित्त मंत्रालय) द्वारा शुरू किया गया एक डिजिटल पेमेंट और फंड मैनेजमेंट सिस्टम है। यह *PFMS* (Public Financial Management System) का ही एक उन्नत (advanced) रूप है, जिसका इस्तेमाल सरकारी योजनाओं के फंड को सुरक्षित रूप से खर्च करने और ट्रैक करने के लिए किया जाता है।
SNA-SPARSH का पूरा नाम है:
*SNA:* Single Nodal Agency (सिंगल नोडल एजेंसी
*SPARSH:* Samayochit Pranali Ekikrit Shighra Hastantaran (समयोचित प्रणाली एकीकृत शीघ्र हस्तांतरण) अंग्रेजी में इसे *Real-time System of Integrated Quick Transfers* कहा जाता है।
इसका मुख्य काम क्या है?
इस सिस्टम को *"Just-in-Time"* (ठीक समय पर भुगतान) के सिद्धांत पर काम करने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य काम केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं (Centrally Sponsored Schemes) के पैसे को बिना किसी देरी के सीधे लाभार्थी या सामान देने वाले वेंडर (दुकानदार/ठेकेदार) के बैंक खाते में पहुँचाना है।
यह पुराने सिस्टम से कैसे अलग है?
*पुराना सिस्टम:* पहले सरकार योजनाओं का पैसा राज्यों को, फिर जिलों को, फिर ब्लॉक को और अंत में ग्राम पंचायतों या स्कूलों के बैंक खातों में एडवांस में भेज देती थी। इससे करोड़ों रुपये महीनों तक अलग-अलग बैंक खातों में बिना इस्तेमाल के पड़े (Parked) रहते थे।
*SNA-SPARSH सिस्टम:* अब पैसा अलग-अलग खातों में जमा नहीं किया जाता। योजना का पैसा सरकार के मुख्य खजाने (Consolidated Fund) में ही रहता है। जब कोई सरकारी एजेंसी, ब्लॉक या स्कूल कोई बिल पोर्टल पर पास करता है, तो
*PFMS, राज्य के ट्रेजरी और रिज़र्व बैंक (RBI e-Kuber)* के नेटवर्क के ज़रिए पैसा सीधा वेंडर के खाते में भेज दिया जाता है।
SNA-SPARSH के मुख्य लाभ
1. *पूरी पारदर्शिता (Transparency):* सरकार को रीयल-टाइम में पता चलता है कि पैसा कहाँ, कब और किसे दिया जा रहा है। एक-एक रुपये का हिसाब ऑनलाइन डैशबोर्ड पर मौजूद रहता है।
2. *रुके हुए पैसों की समस्या खत्म:* क्योंकि पैसा निचले स्तर के खातों में बेकार नहीं पड़ा रहता, इसलिए सरकार को ब्याज का भारी नुकसान नहीं होता।
3. *सीधा और त्वरित भुगतान (Direct Payment):* इसमें कैश या चेक का झंझट खत्म कर दिया गया है। बिल बनते ही पैसा सीधे काम करने वाले वेंडर या लाभार्थी के बैंक खाते में पहुँच जाता है।
4. *भ्रष्टाचार पर रोक:* फंड सीधा सही व्यक्ति तक पहुँचने से बीच में होने वाली गड़बड़ियों और कमीशन बाजी की गुंजाइश लगभग खत्म हो गई है।
*संक्षेप में:* यदि किसी सरकारी विभाग या स्कूल को कोई सरकारी ग्रांट मिलती है (जैसे स्कूलों में मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट या स्कूल ग्रांट), तो उसका खर्च और दुकानदारों को पेमेंट अब इसी SNA-SPARSH व्यवस्था के अंतर्गत PFMS पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।