केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान जी द्वारा कल दिल्ली में HRD मंत्रालय की मीटिंग करने के बाद कहा है कि बेसिक स्कूलों में कम हो रहे नामांकन और घटती गुणवत्ता के दृष्टिगत समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत बेसिक स्कूलों का संचालन व प्रवंधन स्थानीय स्तर पर पंचायत या समाज के वरिष्ठ जनों की समिति को सौपे जाने की योजना है जिसे पहले कुछ जगह लागू किया जायेगा बाद में इसके परिणाम को देखकर व्यापक तौर पर लागू करने की योजना है।
बेसिक शिक्षा का निजीकरण करने की दिशा में भारत सरकार का यह कदम है इसका विरोध होना चाहिए परन्तु करेगा कौन इतने संगठन और उनमे गुट बन गए है सभी को सिर्फ अपने अलावा दूसरा पसंद हीं नहीं, शिक्षक भी इन विभिन्न संगठनों और गुटों को बढ़ावा देने में पीछे नहीं, इसीलिए अब भविष्य भी स्थिर और सुरक्षित नहीं।